Thursday, March 29, 2012
जिंदगी के आईने में घूमते किस्से- भाग १- भेडि़या
मेरे कस्बे में एक शख़्स का नाम तो जो था वो था ही, लेकिन उसे समाज ने एक अजीबोगरीब नाम दे दिया था. भेडिया रख दिया था उसका नाम...वह उसी नाम से आज भी जाना पहचाना जाता है.
एक दिन रात को ९-१२ वाला शो देखकर वह अपने घर जा रहा था, रास्तें में गश्ती पुलिस वालों ने उसे रोका.
ऐ, कौन है, क्या नाम है तेरा, इतनी रात को कहाँ जा रहा है? पुलिस वाले की आवाज़ ने रात के सन्नाटे को तोडा
जी मैं था भेडिया, ओढ़ी हुई लोई से मुँह बाहर निकलते हुए, सटपटाते हुए...भेडिया बोला.
साले...फ़िर इतनी रात को सड़क पर किसी को काटेगा?...पुलिस वाले के विद्युत गति से दो तीन लठ्ठ भेडिये के भागते हुए चूतड़ों पर पड़ चुके थे...
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